भिलाई। केन्द्र सरकार बिजली के उपभोक्ताओं को सौर्य ऊर्जा से उत्पन्न बिजली के उपयोग पर भारी जोर दे रही है, लेकिन पैदा हुए बिजली की कीमत “कौड़ियों के दाम” खरीद रही है।
इसे इस प्रकार समझा जा सकता है कि हम जो भी बिजली का उपयोग करते उसकी गणना 4 रूपये से 8 रूपये प्रति युनिट के दर पर विभाग करता है लेकिन नागरिकों से सौर्य ऊर्जा योजना के तहत बिजली को सरकार कौड़ी के दाम 1 रू 90 पैसे युनिट के दर पर गणना कर भारी लाभ अर्जित कर रही है। इसी बिजली को पुनः अन्य उपभोक्ताओं को बेचकर लाभ ले रही है । इस तरह नागरिकों को अपने व्यवसाय के सहायक के रूप में मुफ्त जरिया बना रही है। बिजली तो नागरिकों द्वारा सोलर पैनल खरीदकर लगाये जा रहे हैं लेकिन इसका लाभ उपभोक्ता को ना मिलकर बिजली विभाग उठा रही है।
सूर्य घर योजना के तहत सोलर पैनल लगाने सम्पूर्ण राशि बैंक के माध्यम से बड़ी आसानी से उपलब्ध करा दी जाती है,और सब्सिडी भी दी जा रही है जिससे देश का हर नागरिक कर्जदार बनने लगा है। उसे भारी बिजली बिल के साथ किस्त की राशि का भुगतान भी करने मजबूर होना पड़ रहा है। प्रत्येक नागरिक को सरकार कर्जदार बनाकर लाभ बिजली विभाग छत्तीसगढ़ विद्युत मंडल को प्रदान कर रही है। जिससे आम नागरिकों में रोष है और सूर्य घर योजना को नागरिकों से धोखा देने की योजना मान रही है।
यदि सौर्य ऊर्जा से उत्पन्न बिजली की गणना विद्युत मंडल व्दारा दिये जा रहे कीमत के बराबर नहीं किया गया तो योजना को सफल बनाना संभव नहीं है।