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होर्मुज स्‍ट्रेट का टंटा होगा खत्‍म, फिर भी बिना झंझट जलेंगे चूल्‍हे, तेल-गैस वाले देश जोड़ेंगे हाथ-पैर, समझिए

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ईरान जंग ने एक बार फिर से फॉसिल फ्यूल (पेट्रोल, डीजल आदि) बेस्‍ड डेवलपमेंट मॉडल की खामियों को उजागर कर दिया है. भारत अपनी तेल जरूरतों का तीन तिहाई आयात करता है. अरब देश एनर्जी का सबसे बड़ा स्रोत हैं. तेल के साथ ही गैस का भी आयात किया जाता है. इनसे ही भारत में गाड़ियां सड़कों पर सरपट भागती हैं और घरों में चूल्‍हे जलते हैं. ऐसे में खाड़ी देश में किसी भी तरह का संकट आने पर उसका सीधा असर भारत भी पड़ता है. अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान अटैक करने के बाद ऐसी ही स्थिति पैदा हो गई है. एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर अपनी पहचान रखने वाले होर्मुज स्‍ट्रेट पर भी इसका व्‍यापक असर पड़ा है. इससे तेल और गैस से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. भारत के लिए होर्मुज जलडमरूमध्‍य काफी अहम है, क्‍योंकि इसी रूट से तेल और गैस के अधिकांश शिपमेंट आते हैं. अब इस निर्भरता को कम करने की दिशा में अहम और निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया गया है. भारत अगले 9 से 10 साल में नॉन-फॉसिल फ्यूल बेस्‍ड पावर कैपेसिटी को कुल उत्‍पादन का 60 फीसद करने का लक्ष्‍य रखा है. इस तरह फॉसिल फ्यूल यानी तेल आधारित ऊर्जा जरूरतों को तकरीबन एक तिहाई तक सीमित कर दिया जाएगा. ऐसे में यदि होर्मुज जैसे संकट की स्थिति में भी देश की ऊर्जा जरूरतों पर ज्‍यादा असर नहीं पड़ेगा.

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