निजी स्कूलों में महंगी किताबों के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने बड़ा एक्शन लिया है. प्राइवेट स्कूलों में पेरेंट्स पर महंगी किताबों को खरीदने के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और कई जगहों पर अभिभावक इसका विरोध भी जता रहे हैं, हालांकि अब इस मसले पर एनएचआरसी ने बड़ा कदम उठाया है.
प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने निजी स्कूलों में महंगी किताबों को लेकर सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है. आयोग ने केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भी नोटिस भेजकर जवाब मांगा है.
यह कार्रवाई नमो फाउंडेशन की शिकायत के आधार पर हुई है, जिसमें निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए छात्रों और अभिभावकों पर दबाव डालने का आरोप है.
आयोग ने राज्यों को राष्ट्रीय स्कूल बैग नीति और शिक्षा का अधिकार अधिनियम की धारा 29 के पालन पर रिपोर्ट देने को कहा है. साथ ही SCERT और NCERT की किताबों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं.
आयोग ने साफ कहा कि सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग किताबें लागू करना “अकादमिक भेदभाव” हो सकता है. अब इस मामले में शिक्षा मंत्रालय के जवाब का इंतजार है.
बता दें कि स्कूलों में महंगी किताबों को लेकर हरियाणा का अभिभावक एकता मंच भी पिछले कई सालों से आवाज उठा रहा है और इसका विरोध कर रहा है. मंच की मानें तो स्कूलों में छोटी-छोटी कक्षाओं में 4-4 हजार रुपये के किताबों के सेट लगाए हुए हैं. स्कूल हर साल पाठ्यक्रम की किताबों में कुछ न कुछ हल्का फेरबदल भी कर देते हैं ताकि पेरेंट्स पुरानी किताबों का इस्तेमाल न कर सकें और उन्हें नई किताबें ही खरीदनी पड़ें. इससे पेरेंट्स के ऊपर हर साल बड़ा आर्थिक बोझ पड़ रहा है.



