ईरान जंग के चलते वैसे तो कई दिक्कतें पैदा हुई हैं, लेकिन तेल और गैस की सप्लाई में आई बाधा चिंता का सबब बनी हुई है. ईरान और अमेरिका दोनों की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट को बार्गेनिंग चिप की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है. तेल और गैस ईरान की इकोनॉमी की रीढ़ है. इसके गड़बड़ाने से तेहरान की आर्थिक समस्याओं का बढ़ना स्वाभाविक है. अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी करने का ऐलान कर दिया, ताकि ईरान को आर्थिक तौर पर कंगाल किया जा सके. इसका एक और पहलू है. होर्मुज स्ट्रेट को इंटरनेशनल एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर भी जाना जाता है. ईरान इस गलियारे की अहमियत को बखूबी समझता है. यही वजह है कि तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया. यहां तक कि ईरानी सेना की तरफ से भारतीय जहाजों पर भी गोलीबारी की गई. तेहरान का मानना है कि होर्मुज को जहाजों की आवाजाही के लिए बंद करने से दुनिया के तमाम देश अमेरिका पर जंग को खत्म करने का दबाव डालेंगे. इस तरह यह मामला दो देशों की रणनीतिक गतिविधयों का अखाड़ा बना हुआ है. इसके चलते भारत समेत दुनिया के अन्य देशों में तेल और गैस को लेकर अफवाहों का बाजार गर्म है. भारत में खंडवा समेत देश के कई अन्य जगहों में पेट्रोल पंपों पर लोगों की लंबी-लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. इन सबके बीच ईरान के खर्ग आइलैंड से राहत भरी खबर सामने आई है. ईरान ने तेल स्टोरेज के लिए 30 साल पुराने जहाज को बाहर निकाला है.
खंडवा में पेट्रोल पंप पर लंबी लाइन, उधर खर्ग तेल से लबालब, स्टोरेज के लिए ईरान ने 30 साल पुराना जहाज निकाला
खर्ग द्वीप ईरान की तेल अर्थव्यवस्था का केंद्र है और देश के लगभग 90% कच्चे तेल का निर्यात यहीं से होता है. यह द्वीप न केवल तेल लोडिंग का प्रमुख हब है, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर भंडारण टैंक भी मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता करोड़ों बैरल में है. हाल के महीनों में सैटेलाइट तस्वीरों और विश्लेषणों से यह संकेत मिले हैं कि ईरान अपने स्टोरेज टैंकर्स से तेजी से तेल निकाल रहा है और निर्यात बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, ऐसे में अगर निर्यात बाधित होता है या टैंकरों की आवाजाही सीमित होती है, तो तेल को रखने के लिए समुद्र में फ्लोटिंग स्टोरेज यानी जहाजों का उपयोग करना पड़ सकता है. बता दें कि खर्ग द्वीप ईरान के लिए ऑयल स्टोरेज प्लांट है. जंग के दौरान यहां भी अटैक किया गया था.



