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भारतीयों के लिए खुशखबरी! दुबई में बदले प्रॉपर्टी नियम, जानें अब किन खरीदारों को मिलेगा रेजीडेंसी वीजा

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दुबई ने प्रॉपर्टी निवेश से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जो खासकर भारतीय खरीदारों के लिए अच्छी खबर है. पहले 2 साल का प्रॉपर्टी ओनर रेजीडेंसी वीजा पाने के लिए कम से कम 7,50,000 दिरहम (लगभग 1.7 करोड़ रुपये) की प्रॉपर्टी खरीदनी जरूरी थी. अब दुबई लैंड डिपार्टमेंट (DLD) ने एकल मालिकों (Sole Owners) के लिए यह न्यूनतम प्राइस की शर्त पूरी तरह हटा दी है.
अब कोई भी व्यक्ति दुबई में कोई भी तैयार प्रॉपर्टी अपने नाम पर खरीदकर 2 साल का रेजीडेंसी वीजा आसानी से पा सकता है. संयुक्त मालिकाना हक (joint ownership) में प्रत्येक व्यक्ति का हिस्सा कम से कम 4,00,000 दिरहम का होना चाहिए. यह बदलाव मिड-मार्केट खरीदारों के लिए दरवाजे खोल रहा है.
मिड-मार्केट इलाकों में बढ़ेगी मांग
इस नए नियम से Jumeirah Village Circle (JVC), International City, Arjan, Discovery Gardens और इसी तरह के मध्यम मूल्य वाले इलाकों में भारी मांग बढ़ने की उम्मीद है. स्टूडियो और 1-बेडरूम अपार्टमेंट खरीदने वाले लोग भी अब आसानी से वीजा प्राप्त कर सकेंगे.

दुबई में रेंटल यील्ड 6-9% तक है, जो भारत के कई बड़े शहरों से कहीं ज्यादा है. छोटी प्रॉपर्टी खरीदकर अच्छा किराया कमाने और दोनों फायदे मिलेंगे. क्षेत्रीय तनावों के कारण कुछ मंदी के बाद यह कदम निवेशक विश्वास को वापस लाने में मदद करेगा.
भारतीय खरीदारों के लिए

भारतीय दुबई के प्रॉपर्टी मार्केट में सबसे सक्रिय विदेशी खरीदारों में शामिल रहे हैं. 2025 में भारतीयों ने दुबई की रेसिडेंशियल डील्स में अच्छी हिस्सेदारी दिखाई और बड़े पैमाने पर निवेश किया. टेक, फाइनेंस और दूसरे प्रोफेशनल्स जो वहां किराए के घरों में रह रहे हैं, अब छोटी प्रॉपर्टी खरीदकर अपनी स्थिति मजबूत कर सकते हैं.
यह वीजा एम्प्लॉयर से स्वतंत्र है, यानी नौकरी छूटने पर भी residency बनी रह सकती है. प्रॉपर्टी का मालिकाना हक आपके पास ही रहेगा, वीजा की अवधि खत्म होने के बाद भी. परिवार को स्पॉन्सर करने के विकल्प भी उपलब्ध हैं. कई भारतीय अब लंबे समय तक दुबई में बसने और निवेश करने की सोच रहे हैं.
मार्केट पर क्या असर पड़ेगा?
यह बदलाव मिड-मार्केट सेगमेंट को बूस्ट देगा. छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे प्रॉपर्टी की डिमांड और कीमतों में स्थिरता आएगी. दुबई सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करना है. यह कदम भारतीयों के लिए प्रॉपर्टी निवेश, अच्छा रिटर्न और लंबी अवधि की रेजिडेंसी का सुनहरा मौका है.

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