ग्लोबल ऑयल मार्केट में एक बहुत बड़ा उलटफेर हुआ है. भारत को अब रूस से भी सस्ता कच्चा तेल मिलने लगा है, अमेरिकी पाबंदियों से जूझ रहा वेनेजुएला अब भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बन गया है. मई के आंकड़ों के मुताबिक, वेनेजुएला ने सऊदी अरब और अमेरिका को भी पीछे छोड़ दिया है. इस समय केवल रूस और यूएई (UAE) ही भारत को तेल बेचने में उससे आगे हैं.
इतना ही नहीं, ब्लूमबर्ग और केपलर के डेटा के अनुसार, भारत इस समय दुनिया भर में वेनेजुएला के कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन चुका है. भारत ने इस मामले में चीन और अमेरिका को भी पछाड़ दिया है.
वेनेजुएला का तेल रूस से भी सस्ता
कुछ समय पहले तक मिडल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण समुद्री रास्तों से तेल लाना मुश्किल हो गया था. इस वजह से भारत पहुंचने वाला रूसी तेल महंगा हो गया. जो रूसी तेल कभी भारी डिस्काउंट पर मिल रहा था, मार्च आते-आते वह अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क (ब्रेंट क्रूड) से भी 6 डॉलर प्रति बैरल महंगा हो गया. इसी बीच वेनेजुएला ने भारत को ब्रेंट क्रूड से करीब 5 डॉलर से 8 डॉलर प्रति बैरल के डिस्काउंट पर तेल ऑफर कर दिया. भारतीय कंपनियों ने तुरंत इसका फायदा उठाया और भारी मात्रा में तेल खरीदना शुरू कर दिया.
छिपा है बड़ा पेंच!
भले ही वेनेजुएला का तेल रूस से भी सस्ता है, लेकिन भारत चाहकर भी रूस को पूरी तरह छोड़कर वेनेजुएला से सारा तेल नहीं खरीद सकता. इसकी दो बड़ी वजहें हैं
तेल का भारी और कड़वा होना: वेनेजुएला का तेल बहुत भारी, गाढ़ा और ‘सोर’ होता है. इसे रिफाइन करना हर किसी के बस की बात नहीं है.
रिफाइनरी की कमी: भारत की ज्यादातर तेल रिफाइनरियां इस भारी तेल को प्रोसेस करने के लिए नहीं बनी हैं. केवल जामनगर रिफाइनरी, इंडियन ऑयल की पारादीप और एचपीसीएल-मित्तल की बठिंडा जैसी कुछ चुनिंदा हाई-टेक रिफाइनरियां ही इसे साफ कर सकती हैं. इसके उलट, रूसी तेल को भारत की लगभग सभी रिफाइनरियां आसानी से साफ कर लेती हैं.
रास्ते की दूसरी मुश्किलें
वेनेजुएला से तेल लाना कोई आसान काम नहीं है. वहां के बंदरगाह पुराने और खस्ताहाल हैं, इसलिए समुद्र के बीचों-बीच एक जहाज से दूसरे जहाज में तेल ट्रांसफर करना पड़ता है, जिसमें काफी रिस्क होता है. इसके अलावा, वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी एडवांस पेमेंट मांगती है, जिससे भारतीय कंपनियों का पैसा ब्लॉक हो जाता है.






