आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर दुनिया भर में नौकरियों पर खतरे की चर्चा लगातार तेज हो रही है. कई रिपोर्टों और विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि एआई के बढ़ते इस्तेमाल से लाखों नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं. हालांकि, ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन की ताजा रिपोर्ट भारत के लिए अपेक्षाकृत सकारात्मक तस्वीर पेश करती है. रिपोर्ट के मुताबिक, एआई का सबसे नकारात्मक प्रभाव विकसित अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है, जहां कंपनियों के लिए कर्मचारियों पर होने वाला खर्च काफी ज्यादा है. ऐसे देशों में लागत कम करने के लिए कंपनियां तेजी से एआई आधारित सिस्टम और ऑटोमेशन को अपनाएंगी. इसके विपरीत भारत जैसे उभरते बाजारों में कम लेबर कॉस्ट होने के कारण एआई अपनाने की गति और आर्थिक जरूरत अलग रहेगी.
बर्नस्टीन का मानना है कि विकसित देशों में कर्मचारियों का वेतन, सामाजिक सुरक्षा और अन्य सुविधाओं पर होने वाला खर्च कंपनियों के लिए बड़ी लागत बन चुका है. ऐसे में इंसानी कार्यबल की जगह एआई आधारित सिस्टम लगाने से उन्हें सीधा आर्थिक लाभ मिल सकता है. भारत में स्थिति अलग है. यहां श्रम लागत अपेक्षाकृत कम है और बड़ी संख्या में कुशल पेशेवर उपलब्ध हैं. यही वजह है कि कंपनियों के लिए कर्मचारियों को पूरी तरह एआई से बदलना आर्थिक रूप से उतना आकर्षक विकल्प नहीं माना जा रहा है.






