भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के जून बुलेटिन में प्रकाशित ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ लेख में कहा गया है कि यदि दक्षिण-पश्चिम मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं रहता, तो इसका असर देश की आर्थिक वृद्धि और महंगाई पर पड़ सकता है. भारत की अर्थव्यवस्था फिलहाल मजबूत स्थिति में है, लेकिन कृषि और ग्रामीण मांग काफी हद तक मानसून पर निर्भर करती है. ऐसे में कमजोर बारिश खाद्य उत्पादन को प्रभावित कर सकती है, जिससे महंगाई बढ़ने और उपभोक्ताओं की क्रय शक्ति पर असर पड़ने की आशंका पैदा हो सकती है.
वैश्विक हालात अभी भी बने हुए हैं चुनौती
लेख में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक माहौल अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है. पश्चिम एशिया में हाल के अंतरिम शांति समझौते से कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं अभी भी बनी हुई हैं. रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में आर्थिक जोखिम ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं और यदि मौजूदा समझौते कमजोर पड़ते हैं या तनाव फिर बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक बाजारों और निवेश गतिविधियों पर दिखाई दे सकता है.






