म्यूचुअल फंड बाजार में हर दिन हजारों नए निवेशक कदम रख रहे हैं. शेयर बाजार की तर्ज पर कई लोग यह मान लेते हैं कि जिस तरह कम कीमत वाला शेयर ‘सस्ता’ और ज्यादा कीमत वाला ‘महंगा’ होता है, वैसा ही म्यूचुअल फंड की नेट एसेट वैल्यू यानी एनएवी (NAV) के साथ भी होता है. लोग अक्सर न्यू फंड ऑफर (NFO) की तरफ सिर्फ इसलिए भागते हैं क्योंकि वह 10 रुपये की एनएवी पर मिल रहा होता है. लेकिन क्या वाकई 10 रुपये की एनएवी वाला फंड 100 रुपये की एनएवी वाले फंड से बेहतर रिटर्न देगा?
NAV का मतलब नेट एसेट वैल्यू होता है. आसान भाषा में कहें तो यह म्यूचुअल फंड की एक यूनिट की कीमत होती है. इसे ऐसे समझिए कि फंड के पास मौजूद सभी निवेश (शेयर, बॉन्ड आदि) की कुल वैल्यू में से खर्च घटाकर उसे कुल यूनिट्स से भाग दिया जाता है. जो कीमत निकलती है, वही एनएवी कहलाती है. इसे ऐसे समझिए कि फंड के पास मौजूद सभी निवेश (शेयर, बॉन्ड आदि) की कुल वैल्यू में से खर्च घटाकर उसे कुल यूनिट्स से भाग दिया जाता है. जो कीमत निकलती है, वही एनएवी कहलाती है.
क्या कम NAV वाला फंड ज्यादा सस्ता होता है?
बिल्कुल नहीं. एनएवी का मतलब शेयर बाजार के शेयर की कीमत जैसा नहीं होता. अगर किसी फंड की एनएवी 10 रुपये है और दूसरे की 100 रुपये तो इसका यह मतलब नहीं कि 10 रुपये वाला फंड बेहतर या सस्ता है. अक्सर नई लॉन्च हुई स्कीम की शुरुआती एनएवी 10 रुपये होती है. वहीं कई पुराने और अच्छा प्रदर्शन करने वाले फंड सालों में बढ़ते-बढ़ते 100 रुपये, 200 रुपये या उससे भी ज्यादा की एनएवी तक पहुंच जाते हैं.






