भारत में ट्रेनें अक्सर लेट होती ही रहती हैं. लेकिन, मडगांव से दिल्ली आ रही एक ट्रेन अपने तय समय से दो घंटे पहले ही फुर्र हो गई. रेलवे की इस अनोखी फुर्ती और बिना बताए टाइम बदलने की वजह से एक यात्री टिकट होने के बाद भी गाड़ी में सफर न कर सका. खुन्नस खाए यात्री ने रेलवे को उपभोक्ता अदालत में घसीट लिया. अब फिरोजपुर जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रेलवे और आईआरसीटीसी को टिकट का पूरा रिफंड लौटाने और हर्जाना भरने का फरमान सुना दिया है.
मामला 10 जून 2024 का है. एक यात्री ने अपनी अपनी पत्नी और बेटी के साथ गोवा के मडगांव से दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन आने के लिए तीन टिकट बुक कराए थे. इसके लिए ₹10,620 चुकाए. सफर के दिन पूरा परिवार तय समय से पहले ही मडगांव स्टेशन पहुंच गया. लेकिन प्लेटफॉर्म पर पहुंचते ही उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. पता चला कि ट्रेन का शेड्यूल बदल दिया गया था और गाड़ी 2 घंटे पहले ही दिल्ली के रवाना हो चुकी थी. यात्री ने जब स्टेशन मास्टर से जवाब मांगा तो उन्होंने कहा कि टाइम बदलने का मैसेज भेजना आईआरसीटीसी का काम है.
दिल्ली पहुंचने के लिए पीड़ित परिवार को आनन-फानन में महंगे रेट में फ्लाइट टिकटें खरीदनी पड़ीं. इसके बाद रेलवे की इस लापरवाही पर यात्री ने उपभोक्ता आयोग में केस दायर किया. कोर्ट में रेलवे और आईआरसीटीसी एक-दूसरे पर इस लापरवाही का ठीकरा फोड़ते नजर आए. रेलवे ने दलील दी कि कोंकण रूट पर हर साल 10 जून से 30 अक्टूबर तक मानसून टाइमटेबल लागू होता है. रेलवे के मुताबिक, टाइम बदलने की सूचना स्टेशन के नोटिस बोर्ड, पब्लिक अनाउंसमेंट और वेबसाइट पर डाल दी गई थी, इसलिए यात्री को खुद समय चेक करना चाहिए था. उधर, आईआरसीटीसी ने कहा कि उसका काम सिर्फ ऑनलाइन टिकट काटना है, ट्रेन कब आ रही है और कब जा रही है, इससे उसका कोई लेना-देना नहीं है.
उपभोक्ता आयोग ने सिखाया सबक
आयोग की अध्यक्ष किरनजीत कौर अरोड़ा और सदस्य सुमन खन्ना ने रेलवे और आईआरसीटीसी की दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. आयोग ने साफ कहा कि यात्रियों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण सेवा पाने का पूरा कानूनी अधिकार है. उन्हें रेलवे प्रशासन की मनमानी और अधिकारियों की मर्जी के भरोसे कतई नहीं छोड़ा जा सकता. केवल वेबसाइट या स्टेशन के नोटिस बोर्ड पर पर्चा चिपका देना काफी नहीं है. ट्रेन के समय में हुए किसी भी बदलाव की स्पष्ट जानकारी मुसाफिरों तक समय रहते पहुंचाना रेलवे और उसकी एजेंसियों की जिम्मेदारी है.



