पंजीयन समस्याओं के निराकरण जिलों में किये जाएंगे:ओपी चौधरी
दुर्ग विधायक गजेन्द्र यादव ने उठाये भूमि पंजीयन कराने रिश्वत मांगे जाने का मामला
रायपुर। लोकसभा चुनाव के दौरान दुर्ग पंजीयन कार्यालय में व्यवसायी ने नामांकन हेतु आवेदन किये जाने पर मोटी रकम की मांग के रूप में रिश्वतखोरी का मामला सोशल मीडिया में काफी वायरल हुआ था। जिसमें मुख्य पंजीयक के नाम सहयोगी व्दारा 25 हजार की मांग करते हुए दिखाया गया था।ऐसे ही मामले प्रदेश के अधिकांश पंजीयन कार्यालय से सामने आने के बाद

जमीन रजिस्ट्री के मामले में हो रही अनियमितताओं की ओर भाजपा के ही बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने प्रश्नोत्तर काल में बात सदन में ध्यान आकर्षित किया। बेलतरा के लिए उठाए गए इस मामले ने सदन में व्यापकता धारण कर ली अनेक सदस्यों ने अपने क्षेत्र की पीड़ा को इस विषय पर उठाया। राजस्व विभाग में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा। कुछ उदाहरण व अनुभव भी सदस्यों ने सदन में बताएं। राजस्व में नुकसान पहुंचाने के रास्ते निकाले जाने की बात बताई। धर्मजीत सिंह ने कहा कि यह समस्या सिर्फ बेलतरा की नहीं है पूरे प्रदेश में इसका विस्तार है। इसके निदान के लिए कलेक्टरों को निर्देश दिए जाएं कि विधायक सांसद व जनप्रतिनिधियों तथा राजस्व संबंधित सभी अधिकारियों के साथ बैठकें होती रहें, ताकि एक एक विधायक अपनी बात विधानसभा में लाने से पहले ही निदान कर ले। बात उठाने की जरूरत ही ना हो। सभी सदस्यों की बात सुनने के बाद मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि प्रक्रिया को सम्पूर्ण पारदर्शी बनाने के लिए सारी कार्यप्रणाली ऑनलाइन करने की तैयारी सरकार की है। पंजीयन की कई शिकायतें आती हैं इसलिए पंजीयन प्रक्रिया में सुधार के लिए विभागीय सतर्कता सेल बनाया गया है। धर्मजीत सिंह के सुझाव पर सहमति व्यक्त करते हुए जिला स्तर पर कलेक्टरों के साथ बैठकों की व्यवस्था के निर्देश देने की बात भी कही। चौधरी ने कहा कि जिला स्तर पर निराकरण ठीक से नहीं हो पाता इसलिए ही सेल का गठन किया है। उन्होंने सुशांत शुक्ला आरोपों पर कहा कि सरकार ने अनेक खसरों के पंजीयन पर प्रतिबन्ध लगाया हुआ है। अगर प्रतिबंधित क्षेत्र में पंजीयन हुआ होगा तो जानकारी दें, हम कार्यवाही करेंगे। कोटवारी जमीन को बेचे जाने व पंजीयन होने की जानकारी देते हुए सदन में बात आई कि ऐसा हो रहा है, क्या उस पर कार्यवाही होगी। ओपी चौधरी ने जानकारी दी कि कोटवारी सेवा भूमि मूलतः सरकार की ही होती है। उसे खरीदा बेचा नहीं जा सकता।




