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पाटन के 18 गांव की भूमि के क्रय विक्रय पर रोक,रेल मंत्रालय के आदेश पर छत्तीसगढ़ सरकार ने लगाई पाबंदी

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भिलाई। परियोजना प्रबंधक / विद्युत, रायपुर, डेडीकेटेड फ्रेट कारीडोर कॉपोर्रेशन ऑफ इण्डिया 1 भारत सरकार (रेल मंत्रालय) का उपक्रम के पत्र क्रमांक डीएफसी/यू//दुर्ग/105 डेट 03.06.2026 के अनुसार दुर्ग जिले में प्रस्तावित ईस्ट-वेस्ट डेडीकेटेड फ्राइट कॉरिडोर (डानकुनी-सूरत) परियोजना के निर्माण हेतु तहसील दुर्ग एवं पाटन के 18 ग्रामों के लगभग 326 एकड़ भूमि का अधिग्रहण करने का लेख किया गया है।

दुर्ग तहसील अंतर्गत ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह, सिरसाकला, परसदा (पाहंदा) एवं पाटन तहसील अंतर्गत ग्राम परेवाडीह, पहडोर, सोमनी, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, एवं पथरीडीह कुल 18 ग्रामों की निजी एवं शासकीय भूमि प्रभावित होगी। पूर्व में हुए रेलवे अवसंरचना परियोजनाओं के कार्यान्वयन से प्राप्त अनुभव के आधार पर यह देखा गया है कि ऐसी परियोजनाओं की घोषणा अक्सर प्रस्तावित मार्ग के आसपास की भूमि की अनधिकृत बिक्री पुनर्विक्रय को बढ़ावा देती है। ऐसे लेन-देन वास्तविक भूस्वामियों और परियोजना प्रभावित व्यक्तियों (पीएपी) को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करते हैं, भूमि अधिग्रहण प्रक्रियाओं में जटिलताएं उत्पन्न करते हैं और परियोजना कार्यान्वयन में देरी करते हैं। इसके अलावा भूमि बिचौलियों की गतिविधियां की भी संभावना है, जो ईडब्ल्यूडीएफसी परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की सुचारू प्रगति में बाधा डाल सकती हैं। उक्त रेलवे लाइन के अभिसरण क्षेत्र में आने वाली सभी भूमियों की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने हेतु अनुरोध किया गया है।
छ.ग. शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग, मंत्रालय, महानदी भवन नवा रायपुर, अटल नगर के पत्र क्रमांक 2801/2024/सात 1 नवा रायपुर, अटल नगर, दिनांक 14/10/24 में उल्लेख है कि अर्जन के अधीन भूमि का बटांकन, छोटे टुकडों में अंतरण एवं प्रयोजन में परिवर्तन के कारण भूमि अर्जन की लागत में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। इस प्रक्रिया में मूल भूमिस्वामी को समुचित लाभ होने के बजाय भूमि की खरीद-बिक्री में संलिप्त बिचौलियों और भू-माफियाओं द्वारा लाभ अर्जित किया गया है। साथ ही भूमि के अवैधानिक अंतरण के कारण शासन को अनावश्यक आर्थिक क्षति होने के अलावा वाद कारणों की बहुलता होती है। परिणामस्वरूप सार्वजनिक हितों के परियोजनाओं में अनावश्यक विलंब होता है। अतः भूमि-अर्जन प्रक्रिया के अधीन भूमि के बेहतर प्रशासन के लिये तत्काल आवश्यक कार्यवाही किये जाने की आवश्यकता को देखते हुये किसी भी विधि के अधीन अपेक्षक निकाय से प्राप्त प्रस्ताव या अर्जन की प्रक्रिया में जारी किसी अधिसूचना या खनन के लिये जारी किसी आशय पत्र प्राप्ति के उपरांत उक्त भूमि का खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन कलेक्टर की लिखित अनुज्ञा के बिना नहीं किये जाने तथा भूमि के खसरा के कालम-12 में इसकी समुचित प्रविष्टि तत्काल की जाने के निर्देश प्राप्त हुए थे।

3-तदुपरांत छत्तीसगढ भू-राजस्व संहिता (संशोधन) अधिनियम 2024 छ.ग. राजपत्र में प्रकाशन दिनांक 3/3/2025 द्वारा धारा 165, 172 एवं 178-ख के संशोधित प्रावधानों के अनुसार अपेक्षक निकाय से प्रस्ताव प्राप्त होने के पश्चात या अर्जन हेतु अधिसूचना जारी होने के पश्चात भू-अर्जन हेतु प्रस्तावित भूमि का खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन प्रतिषिद्ध किया गया है।
4-अतः परियोजना प्रबंधक / विद्युत, रायपुर, डेडीकेटेड फेट कारीडोर कॉपोर्रेशन ऑफ इण्डिया लि० के पत्र क्रमांक DFC/EW/W/Durg/105 Date 03.06.2026 अनुसार दुर्ग तहसील अंतर्गत ग्राम बिरेझर, चंगोरी, कोनारी, चंदखुरी, हनोदा, खम्हरिया, उमरपोटी, उतई, डुमरडीह, सिरसाकला, परसदा (पाहंदा) एवं पाटन तहसील अंतर्गत ग्राम परेवाडीह, पहडोर, सोमनी, औंधी, मगरघटा, बेन्द्री, एवं पथरीडीह कुल 18 ग्रामों के निजी भूमि का खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी-बिक्री आदि को प्रभावित ग्रामीणों के हितों की रक्षा और परियोजना के कार्यान्वयन में पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु तत्काल प्रभाव से आगामी आदेश पर्यन्त अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किया जाता है।

5-उपरोक्त ग्रामों में किसी भी प्रकार का खाता विभाजन, अंतरण, व्यपवर्तन, खरीदी-बिक्री के संबंध में हितबद्ध / प्रभावित व्यक्ति अथवा पक्षकार, अधोहस्ताक्षरकर्ता के समक्ष अपना अभ्यावेदन प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रस्तुत अभ्यावेदनों पर अपेक्षक निकाय से अभिमत प्राप्त कर उचित निर्णय लिया जाएगा।
उक्त आदेश तत्काल प्रभावशील होगा।
कलेक्टर,दुर्ग

 

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