देश की पहली स्वदेशी सेमी-हाई स्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस के डिजाइनर सुधांशु मणि ने उच्च गति वाली ट्रेनों के डिजाइन एवं विनिर्माण का काम केवल बीईएमएल को दिए जाने के रेल मंत्रालय के फैसले पर नाखुशी जताई है. मणि ने कहा कि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ), चेन्नई के पास लंबी दूरी वाले ट्रेनों के डिजाइन और विनिर्माण का खासा अनुभव है, जबकि बीईएमएल का इस क्षेत्र में सीमित अनुभव रहा है.
रेल मंत्रालय की उत्पादन इकाई आईसीएफ हर साल औसतन 3,000 से अधिक कोच बनाती है, जिनमें पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरह के कोच शामिल हैं. रक्षा मंत्रालय के अधीन आने वाले बीईएमएल रक्षा, एयरोस्पेस, मेट्रो और अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में काम करती है. सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत साल 2024 में बीईएमएल को 250 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार वाली बुलेट ट्रेन (बी-28) का एक सेट विकसित करने का ठेका दिया था, जिसे साल 2027 तक तैयार किया जाना है. इसके अलावा 16 अन्य ट्रेनों का ठेका भी बीईएमएल को देने की प्रक्रिया जारी होने की खबरें हैं.
कंपनी की क्षमता साबित होना बाकी
उन्होंने कहा कि बीईएमएल की मुख्य लाइन वाले यात्री कोच डिजाइन करने की क्षमता अभी साबित नहीं हुई है. यह भी दावा किया कि वंदे भारत के स्लीपर संस्करण के विकास में अधिकांश डिजाइन इनपुट आईसीएफ ने ही दिए थे. मणि ने कहा कि मौजूदा ऑर्डर के तहत दो ट्रेन सेट की आपूर्ति साल 2027 से पहले संभव नहीं दिखती और उनके प्रदर्शन का परीक्षण साल 2028 तक ही पूरा हो पाएगा. ऐसे में एक ही कंपनी पर अत्यधिक भरोसा करना मेरी समझ से परे है.
उन्होंने कहा कि बीईएमएल की मुख्य लाइन वाले यात्री कोच डिजाइन करने की क्षमता अभी साबित नहीं हुई है. यह भी दावा किया कि वंदे भारत के स्लीपर संस्करण के विकास में अधिकांश डिजाइन इनपुट आईसीएफ ने ही दिए थे. मणि ने कहा कि मौजूदा ऑर्डर के तहत दो ट्रेन सेट की आपूर्ति साल 2027 से पहले संभव नहीं दिखती और उनके प्रदर्शन का परीक्षण साल 2028 तक ही पूरा हो पाएगा. ऐसे में एक ही कंपनी पर अत्यधिक भरोसा करना मेरी समझ से परे है.



