रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह जब एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान किया था, तो उनका सबसे ज्यादा जोर विदेशी निवेश लाने पर था. इसके लिए टैक्स छूट लेकर तमाम तरह के नियमों को आसान बनाने का भी ऐलान किया गया था और अब उनके इन फैसलों का असर भी दिखना शुरू हो गया है. विदेशी संस्थागत निवेशकों के बीच सरकारी बॉन्ड में पैसे लगाने की होड़ मच गई है. देखते हुी देखते पूर्ण सुलन मार्ग यानी एफएआर के जरिये सरकारी प्रतिभूतियों में कुल विदेशी निवेश बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.
भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) ने आंकड़े जारी कर बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सरकार की तरफ से कर छूट दिए जाने के बाद ‘पूर्ण सुलभ मार्ग’ (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में 8,794.74 करोड़ रुपये का निवेश किया है. सरकारी प्रतिभूतियों से मतलब सरकारी बॉन्ड से है. आरबीआई गवर्नर ने इस बॉन्ड में निवेश करने पर विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट दिए जाने का ऐलान किया है.
सरकार ने क्या किया है बदलाव
सरकार ने 5 जून को आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए सरकारी बॉन्ड में एफपीआई निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को टैक्स से छूट दे दी थी. यह छूट एक अप्रैल, 2025 से प्रभावी मानी जाएगी. इसका मतलब है कि अगर किसी विदेशी निवेशक ने पिछले साल भी सरकारी बॉन्ड में पैसे लगाए थे तो उन्हें भी अपने मुनाफे पर किसी तरह के टैक्स भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी.






