रायपुर । पश्चिम बंगाल से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को खदेड़ने और उनके लौटने की तस्वीरें व वीडियो सोशल मीडिया और न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर देखे जा सकते हैं। पश्चिम बंगाल में सरकार बदलने के बाद अवैध प्रवासियों के खिलाफ चलाए गए ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ अभियान के तहत हकीमपुर (उत्तर 24 परगना) जैसे बॉर्डर चेकपोस्ट पर भारी भीड़ देखी जा रही है।
वहीं आसाम राज्य से भी बांग्लादेश के बार्डर लगभग 363 किमी लंबा है।जिसमें कछार-सिलहट सेक्टर से सिर्फ 33.6 किलोमीटर की दूरी पर ही बांग्लादेश की सीमा लगी है,जिसके कारण वे बड़े आसानी से आसाम में प्रवेश करने में सफल रहे हैं। लेकिन केन्द्र एवं राज्य सरकारों व्दारा कठोर कदम उठाये जाने के बाद से ही जहां वे उल्टे पांव जाने मजबूर या वापसी के राह पर हैं वहीं भारी संख्या में बांग्लादेशियों के भारत के विभिन्न जिलों में फैलने का अंदेशा लगाया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ का क्षेत्रफल कम होने के साथ ही भोले भाले लोग माने जाते हैं,उन्हें आसानी से बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन किये जाने जैसे मामले सामने आते रहे हैं। जिससे संदेश व्यक्त किया जा रहा है कि बांग्लादेशी वापसी न कर छत्तीसगढ़ में कंस्ट्रक्शन, उद्योग धंधो के क्षेत्र में बड़े आसानी से श्रमिकों के रूप में कार्य करने लगे हैं।
ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग की सक्रियता आवश्यक हो जाती है। यदि नये कंस्ट्रक्शन क्षेत्रों तथा फैक्ट्रियों में कार्यरत मजदूरों की जांच पड़ताल गंभीरता पूर्वक करती है तो अवश्य ही बड़ी संख्या में बांग्लादेशियों की पहचान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।