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छत्तीसगढ़ शासन की नई पहल धान के स्थान पर अन्य फसल लगाने वाले कृषकों को दी जाएगी 15 हजार रूपए की राशि आदान सहायता राशि-छत्तीसगढ़ शासन की नई पहल 

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दुर्ग, 25 जून । छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के किसानों को आर्थिक संबल प्रदान करने और कृषि क्षेत्र में आधुनिक बदलाव लाने के उद्देश्य से कृषक उन्नति योजना के क्रियान्वयन हेतु नवीन दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। कृषि विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार विगत खरीफ में धान की फसल लेने वाले ऐसे कृषक, जिन्होने आगामी खरीफ में धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसल लेने हेतु एकीकृत किसान पोर्टल पर पंजीयन कराया हो, उन्हें एग्रीस्टेक पर पंजीयन तथा डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर राशि 15,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से तथा पूर्व से ही खरीफ में दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी और कपास की फसल लेने वाले कृषकों को एकीकृत किसान पोर्टल तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन एवं डिजिटल क्रॉप सर्वे में रकबे की पुष्टि उपरांत मान्य रकबे पर पूर्ववत् राशि 10,000 रुपये प्रति एकड़ की दर से आदान सहायता राशि प्रदान की जाएगी। जिन क्षेत्रों में रकबे की पुष्टि हेतु डिजिटल क्रॉप सर्वे का डेटा उपलब्ध नहीं है, वहां जिला कलेक्टर की अनुमति पर गिरदावरी से सत्यापित रकबे पर आदान सहायता राशि दी जाएगी। योजनांर्गत आदान सहायता राशि कृषकों के बैंक खाते में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डी.बी.टी.) के माध्यम से की जाएगी।
उप संचालक कृषि संदीप कुमार भोई द्वारा बताया गया है कि नए नियम खरीफ वर्ष 2026 से प्रभावी रूप से लागू होंगे। शासन का यह कदम राज्य में पारंपरिक धान की खेती के स्थान पर अन्य लाभकारी खरीफ फसलों को बढ़ावा देने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत निर्णय है। जिले का अधिकांश कृषि क्षेत्र वर्षा आधारित होने के कारण मौसम की अनिश्चितता और कृषि आदान लागत में लगातार हो रही वृद्धि से किसानों की आय प्रभावित होती रही है। इसके फलस्वरूप कई बार किसान उन्नत बीज, उर्वरक, कीटनाशक और कृषि यांत्रिकीकरण जैसी आवश्यक तकनीकों में पर्याप्त निवेश नहीं कर पाते हैं। इसी समस्या को दूर करने और किसानों की काश्त लागत को कम करने के लिए राज्य सरकार द्वारा खरीफ वर्ष 2023-24 से कृषक उन्नति योजना संचालित की जा रही है, जिसके स्वरूप में अब फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए व्यापक परिवर्तन किया गया है। योजना का मुख्य उद्देश्य फसल आच्छादन, उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि करना और कृषि को एक लाभप्रद व्यवसाय के रूप में पुर्नस्थापित करना है। साथ ही जिले में प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान योजना (पीएम-आशा योजना) के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन फसलेें अरहर 8000 रुपये प्रति क्वि., उड़द 7800 रुपये प्रति क्वि., मूंग 8768 रुपये प्रति क्वि., सोयाबीन 5328 रुपये प्रति क्वि., मूंगफल्ली 7263 रुपये प्रति क्वि. की दर से खरीदी की जाती है।
कृषि विभाग किसान भाईयो से अपील करता है कि वर्तमान मौसमी परिस्थिति को देखते हुए धान के बदले अन्य वैकल्पिक फसल दलहन, तिलहन और पोषक अनाज (मिलेट्स) जैसी फसलों को अपनाएं। इससे न केवल आपकी भूमि की उर्वरा शक्ति बढ़ेगी बल्कि आधुनिक कृषि तकनीकों और फसल विविधीकरण के माध्यम से आपकी आय में भी वृद्धि होगी। योजना का लाभ सभी छोटे, सीमांत एवं बड़े किसानों को मिलेगा, बशर्ते उनकी भूमि का वैध रिकॉर्ड दर्ज हो। पंजीयन के लिए आधार कार्ड, भूमि संबंधी दस्तावेज बी-1, पी-2, डी.बी.टी सक्रिय बैंक खाता पासबुक व चालू मोबाइल नंबर आवश्यक होंगा। किसान फसल प्रविष्टि में संशोधन या एकीकृत पोर्टल में पंजीयन संबंधी जानकारी के लिए अपने निकटतम प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति एवं ग्रामीण कृषि विस्तार से तथा एग्रीस्टेक पर पंजीयन हेतु निकटतम लोक सेवा केन्द्र, से संपर्क कर सकते हैं।

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