अगर आपके पास होम लोन है या आप जल्द ही घर खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो आपने कई बार सुना होगा कि ‘RBI ने रेपो रेट बढ़ा दिया’ या ‘RBI ने रेपो रेट घटा दिया.’ इसके बाद खबर आती है कि होम लोन की EMI सस्ती या महंगी हो सकती है. लेकिन आखिर RBI के फैसले का आपकी जेब से क्या कनेक्शन है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की जिम्मेदारी महंगाई पर कंट्रोल रखना, अर्थव्यवस्था में पैसों का बैलेंस बनाए रखना और बैंकिंग सिस्टम को मजबूत रखना है. इसी मकसद से आरबीआई हर 2 महीने में मॉनेटरी पॉलिसी की समीक्षा करता है और जरूरत पड़ने पर ब्याज दरों में बदलाव करता है.
रेपो रेट से शुरू होता है पूरा खेल
आरबीआई जिस ब्याज दर पर बैंकों को पैसा उधार देता है, उसे रेपो रेट कहा जाता है. अगर आरबीआई रेपो रेट घटा देता है, तो बैंकों को सस्ता पैसा मिलता है. अगर रेपो रेट बढ़ा देता है, तो बैंकों के लिए पैसा महंगा हो जाता है. यही बदलाव आगे चलकर होम लोन की ब्याज दरों और ईएमआई पर असर डालता है.






