Home छत्तीसगढ़ हुनर को रोजगार बना आत्मनिर्भर बन रहीं बिहान की महिलाएं

हुनर को रोजगार बना आत्मनिर्भर बन रहीं बिहान की महिलाएं

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रक्षाबंधन का पर्व भाई-बहन के स्नेह और अटूट रिश्ते का प्रतीक है। इस पवित्र रिश्ते को मजबूत करने वाली राखियां अब ग्रामीण महिलाओं के हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भरता की पहचान भी बन रही हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) बिहान से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्थानीय सामग्री और अपनी रचनात्मकता का उपयोग कर आकर्षक एवं पारंपरिक राखियां तैयार कर रही हैं। इनके निर्माण और बिक्री से महिलाओं को स्वरोजगार के साथ अतिरिक्त आय का अवसर मिल रहा है।

महिलाएं तैयार कर रही हैं आकर्षक राखियां

जांजगीर-चांपा जिले के बलौदा विकासखंड की ग्राम पंचायत रसौटा की जागृति स्व-सहायता समूह की महिलाओं सहित जिले के विभिन्न ग्राम पंचायतों की समूह सदस्य इन दिनों राखी निर्माण में जुटी हैं। महिलाएं धान, चावल, रंगीन मोती, नग, स्टोन, ऊन, मौली एवं रेशम के धागों सहित विभिन्न रंग-बिरंगी सजावटी सामग्रियों का उपयोग कर आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। बाजार से आवश्यक सामग्री खरीदने के बाद महिलाएं इन्हें अपने घरों में कलात्मक रूप देकर सुंदर राखियों का रूप देती हैं।

स्थानीय बाजार से लेकर कलेक्टोरेट परिसर तक बिक्री

स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार राखियों को स्थानीय बाजारों और विभिन्न बिक्री केंद्रों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। महिलाओं ने कलेक्टोरेट परिसर में भी स्टॉल लगाकर अपनी हस्तनिर्मित राखियों की बिक्री की। पर्व के अवसर पर इन राखियों को लोगों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है, जिससे समूह की महिलाओं को अपनी मेहनत का बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।

बिहान से जुड़ने पर मिला महिलाओं को आय का साधन

जागृति स्व-सहायता समूह की सचिव श्रीमती सुनीता अनंत ने बताया कि समूह की महिलाओं द्वारा तैयार राखियों की स्थानीय बाजारों के साथ कलेक्टोरेट परिसर में भी बिक्री की गई। इससे उन्हें अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है। उन्होंने बताया कि बिहान से जुड़ने के बाद महिलाओं को अपने हुनर को आगे बढ़ाने और उसे आय के साधन में बदलने का अवसर मिला है।

हुनर से बढ़ा आत्मविश्वास, आर्थिक सशक्तिकरण को मिली नई दिशा

बिहान से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अब पारंपरिक घरेलू जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक गतिविधियों में भी सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं। अपने हाथों के हुनर को आजीविका का साधन बनाकर वे परिवार की आय में योगदान दे रही हैं और आर्थिक रूप से सशक्त बन रही हैं। राखी निर्माण का यह कार्य महिलाओं के लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आय का नया अवसर लेकर आया है।

समूह की महिलाओं का कहना है कि उनके हाथों से तैयार राखियों को बाजार में लोगों द्वारा पसंद किया जाना उनके लिए खुशी और गर्व का विषय है। स्व-सहायता समूह के माध्यम से उन्हें एक-दूसरे से सीखने, नए डिजाइन विकसित करने और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है।

बिहान के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के हुनर को बाजार से जोड़ने की यह पहल महिला सशक्तिकरण, स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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