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दुर्गा मंदिर कुम्हारी से लगे बेशकीमती शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा, जनप्रतिनिधि और राजस्व विभाग के मिलीभगत की आशंका  

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 दुर्ग जिले के कुम्हारी नगर पालिका कार्यालय से लगे बेशकीमती शासकीय भूमि पर रसूखदारों व्दारा राजस्व अमले की मिली भगत से हथियाने की कोशिश की जा रही है। इस अवैध कब्जे को रोकने स्वामी विवेकानंद वेलफेयर सोसायटी ने इसकी शिकायत कलेक्टर दुर्ग, अनुविभागीय अधिकारी भिलाई 3 से की है,जिसकी जांच तहसीलदार व्दारा की जा रही है।
कूट रचना कर शासकीय नक्शे में शासकीय शब्द पर सफेदी लगाकर पंजीयन कराया गया
जिले के अंतिम छोर में बसे कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में पिछले 60 वर्षों से सभी के आस्था का केन्द्र रहे दुर्गा मंदिर के आसपास के करीब 10 एकड़ शासकीय भूमि पर सीमेंट की दीवार खड़ी कर तथा शासकीय दस्तावेजों में कूट रचना कर कब्जा कर लिया गया है। आश्चर्य की बात तो यह है उक्त भूमि नगर पालिका भवन से लगी है और कब्जे से कार्यालय में आवाजाही भी बाधित हो रही है लेकिन किसी भी पार्षद , अध्यक्ष या अधिकारी को नजर नहीं आ रही है।
 जब उक्त विषय में जानकारी स्वयंसेवी संस्था स्वामी विवेकानंद वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारियों को हुई तो इसकी लिखित शिकायत अनुविभागीय अधिकारी भिलाई 3 को लिखित आवेदन देकर दी गई और मंदिर के मुख्य मार्ग को सुगम करने की मांग की गई।
     अनुविभागीय अधिकारी भिलाई 3 के मौखिक आदेश पर राजस्व निरीक्षक ने स्थल निरीक्षण तो किया लेकिन उक्त कब्जे को हटाने संबंधी किसी प्रकार कोई कार्यवाही नहीं की गई।
    ज्ञात हो कि 20 वर्ष पहले तक ख्याति प्राप्त हिम्मत स्टील फाउंड्री चालू उद्योग था, लेकिन इसके मालिकों के गलत नितियों के कारण बैंक कर्जों के चलते कारखाने में ताले लग गये। कर्ज नहीं पटा पाने की स्थिति में बैंकों ने कम्पनी पर ताले लगा दिये।
     बैंकों ने अपने कर्ज की राशि की वसूली के लिए इसे नीलाम करने की कोशिश की गई लेकिन बिक नहीं सकी। वर्तमान में जानकारी के अनुसार रायपुर के किसी बड़े उद्योग घराने ने इसे 54 करोड़ में खरीदा। लेकिन शंका यह व्यक्त की जा रही है कि फैक्ट्री की आधे से अधिक भूमि लीज की शासकीय थी जिसे मालिक व्दारा बैंक में गिरवी रखकर भारी लोन लिया गया था। बैंक लोन प्राप्त करने लीज की शासकीय भूमियों को भी बैंक में गिरवी रख दिया गया होगा,जिसे बैंक व्दारा बेच दी गई होगी।
वर्तमान मूल नक्शे में दर्शाये गये भूमि का प्रकार
सोचनीय पहलू यह है कि नगर पालिका कार्यालय से लगे इस बहुमूल्य जमीन की वर्तमान स्थिति राजस्व अभिलेख में शासकीय दर्शाने के बावजूद खड़े किये जा रहे दीवार निर्माण को रोका नहीं गया और राजस्व विभाग इसे चिन्हांकित करने में अक्षमता क्यों दिखा रही है। जबकि कुम्हारी नगर पालिका क्षेत्र में किसी शासकीय योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए इतनी बड़ी जमीन नहीं है फिर भी राजस्व विभाग, नगरीय निकाय विभाग,नगर के जनप्रतिनिधि गण मौनव्रत धारण किये मूक दर्शक बने बैठे है।

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