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सप्ताह भर मंथन के बाद तीन पर्यवेक्षक नियुक्त 36 घण्टे में छत्तीसगढ़ को मिल जायेंगे मुख्यमंत्री

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रायपुर। चुनाव परिणाम तय होने के बाद छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री के पद के लिए मंथन शुरू हो गया है। प्रदेश में आदिवासी और महिला मुख्यमंत्री की मांग हमेशा उठती रही है। जिसे भांपते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आगामी लोकसभा चुनाव को भांपते हुए भारी चिंतन के पश्चात मुख्यमंत्री का चयन करने जा रही है।

   रमन सिंह ने 15 वर्षो तक बखूबी छत्तीसगढ़ की सरकार चलायी थी लेकिन 2018 में जनता ने उन्हें हटाकर भूपेश बघेल को सत्ता सौंप दी थी। दुर्भाग्य ही होगा कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता टीएस सिंहदेव और भूपेश बघेल के बीच मुख्यमंत्री के पद को लेकर मनमुटाव हो जाने के फलस्वरूप कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ा और हार का सामना करना पड़ा।

  अम्बिकापुर के दिग्गज नेता टीएस सिंहदेव के साथ सभी 14 सीटों से हार के बाद सरगुजा पूरी तरह भाजपा के झोली में आ चुकी है, और हाईकमान भाजपा भी मुख्यमंत्री भी आदिवासी बाहुल्य क्षेत्रों से चुनने का मन बना चुका है। मुख्य दावेदारों में पहले नम्बर पर रेणुका सिंह, गोमती साय और पूर्व भाजपा अध्यक्ष एवं मंत्री विष्णुदेव साय को माना जा रहा है।

वहीं, भाजपा ने छत्तीसगढ़ में अर्जुन मुंडा, सर्वानंद सोनोवाल और दुष्यंत कुमार गौतम को पर्यवेक्षक के पद के लिए नियुक्त किया है।वे रविवार को भाजपा  विधायकों से सलाह मशवरा कर मुख्यमंत्री घोषित करेगी यही राजनीतिक गलियों में माना जा रहा है।

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