रायपुर । भूमि क्रय विक्रय से प्राप्त राजस्व से सरकार प्रदेश में विकास कार्य करती है लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार के अनायास ही जमीन के गाइड लाइन में वृद्धि किये जाने से प्रदेश में रियल स्टेट और जमीन के व्यवसाय में जैसे ग्रहण लग गये हैं।
दो माह पूर्व प्रदेश की सरकार ने भूमि के गाइड लाइन में लगभग तीन गुना वृद्धि कर दी गई थी। जिसके बाद सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में जमीन के क्रय-विक्रय पर विराम सा लग गया है। अब स्थिति यह हो गई है कि गांव के किसान भी आवश्यकता पड़ने पर कृषि भूमियों को बेचने में असमर्थ हैं।
अप्रत्याशित वृद्धि का असर विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष पर पड़ने लगा है। जिसका विरोध रायपुर के सांसद और वरिष्ठ पूर्व विधायक ब्रिज मोहन अग्रवाल ने भी किये लेकिन साय सरकार पर खास असर नहीं हुआ सिर्फ राजधानी क्षेत्र के गाइड लाइन में मामूली कमी कर खानापूर्ति कर दिया गया। अब तो भाजपा से जुड़े कार्यकर्ताओं में विरोध के स्वर उठते नजर आ रहे हैं।
हो न हों सरकार का मूल उद्देश्य अवैध भूमि विक्रय पर रोक लगाना और गृह निर्माण मंडल व्दारा बनाये गये मकानों की बिक्री में वृद्धि लाना था लेकिन इसका असर आम लोगों पर पड़ने लगा है। शहरों के साथ गांव की कृषि भूमि के विक्रय पर भी विराम सा लग गया है। जमीन की रजिस्ट्री में कमी का असर पंजीयन कार्यालय में उपस्थिति से लगाया जा सकता है वहीं स्टैंप वैंडरो के समक्ष रोजी रोटी की समस्या खड़ी हो गई है। अब बिल्डर्स और किसानों के माथे पर भी अपने और बच्चों के भविष्य की चिंताओं की लकीरें साफ दिखने लगी है।