चांदी को लंबे समय से “गरीबों का सोना” कहा जाता रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि सोने के मुकाबले इसकी कीमत काफी कम होती है और आम निवेशक भी आसानी से इसमें निवेश कर सकता है. लेकिन बाजार में तेजी आने पर चांदी का व्यवहार पूरी तरह अलग हो जाता है. जहां सोना धीरे धीरे ऊपर जाता है, वहीं चांदी अचानक तेज रफ्तार पकड़ सकती है और उतनी ही तेजी से गिर भी सकती है. साल 2026 में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला है. निवेशकों के बीच यह चर्चा है कि आने वाले महीनों में चांदी सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है. इसके पीछे सिर्फ निवेशकों की खरीदारी नहीं बल्कि कई मजबूत औद्योगिक कारण भी मौजूद हैं.
अगर 2026 के शुरुआती महीनों के प्रदर्शन को देखें तो सोने ने लगभग 7.48 फीसदी का स्थिर रिटर्न दिया है. सोने को लगातार दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों का समर्थन मिल रहा है और यही वजह है कि इसमें बड़ी गिरावट देखने को नहीं मिली. दूसरी तरफ चांदी ने साल की शुरुआत में जबरदस्त तेजी दिखाई. जनवरी में ही इसकी कीमतों में करीब 19 फीसदी का उछाल देखने को मिला. लेकिन इसके बाद बाजार में भारी मुनाफावसूली हुई और एक समय चांदी में करीब 26 फीसदी तक की बड़ी गिरावट भी दर्ज की गई. मई के आखिर तक इसका कुल रिटर्न करीब 5.16 फीसदी के आसपास रहा. यानी चांदी ने यह जरूर दिखाया कि उसमें तेजी की ताकत मौजूद है, लेकिन यह भी साबित किया कि उसका रास्ता सोने जितना आसान नहीं है.





