रियासी क्षेत्र के बिल्डरों, कालोनाइजरों एवं भूमि स्वामियों में बढ़ा सरकार के खिलाफ आक्रोश
भिलाई। दो माह पूर्व प्रदेश सरकार ने रेलवे के विस्तारीकरण के तहत जारी आदेशानुसार पाटन विधानसभा के अन्तर्गत 18 गांव की भूमियों के खरीदने,बेचने जैसे कार्यों पर पूर्ण रूप से रोक लगा दी गई है।
पूर्व जानकारी के बिना इस तरह कृषि,आवासीय,डायवर्टेड जैसे जमीनों पर अप्रत्याशित रूप से रोक लगाये जाने का क्षेत्र के किसानों में भाजपा के प्रदेश सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पनपने लगा है।
कुम्हारी से लगे ग्रामीण क्षेत्रों परसदा,पाहंदा अमलेश्वर में वर्षों से अनेकों बिल्डरों व्दारा कालोनी विकसित किया जाता रहा है लेकिन प्रदेश सरकार व्दारा अनायास जमीन,प्लाटों को खरीदने-बेचने पर रोक लगा दिया गया है।
ग्रामीण अंचलों में किसान अपने अति आवश्यक कार्यों की पूर्ति जमीन बेचकर या किराये पर देकर वर्षों से करते रहे हैं। लेकिन राजस्व मामलों में रोक लगा दिये जाने से भूमि का सीमांकन,बंटवारा फौती जैसे अति आवश्यक कार्य भी नहीं हो रहे हैं।
विगत दिनों जमीन से जुड़े कारोबारी जिला कलेक्टर से भेंट कर अपनी समस्याओं से अवगत कराये गये। लेकिन उन्हें भी रोक लगाये जाने और हटने की समय सीमा की जानकारी नहीं है। ऐसी स्थिति में व्यापारियों, किसानों तथा आम नागरिकों में क्षेत्रीय विधायक,सांसद एवं भाजपा सरकार के खिलाफ रोष व्याप्त है कि वे लुभावने वादों के साथ जनता का मत हासिल कर नागरिकों के हित में कार्य करने का वादा किया करते हैं और जीत हासिल करने के बाद उदासीन होने के साथ निजी कार्यों में ही मशगूल हो जाते हैं जनता पर टैक्स का बोझ और तरह तरह के नियम-कानून थोप दिये जाते हैं। भाजपा सरकार की अनेकों रीति और नितियों से छत्तीसगढ़ में जनता बूरी तरह जकड़ी हुई महसूस करने लगी है। यदि इस तरह लगाये गये रोक से किसानों और व्यापारियों को अविलंब छुटकारा नहीं मिला तो सड़क पर आकर धरना प्रदर्शन करने बाध्य होंगे।