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रेलवे क्षेत्र के विस्थापितों को सहारे की तलाश, हाल पूछने नहीं आये कोई जनप्रतिनिधि 

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कुम्हारी। वर्षों से रेल्वे स्टेशन रोड पर गुमटियां बनाकर या जमीन पर बैठकर दर्जनों नगर के फुटकर व्यवसायी हो या गांव की वह महिलाएं जो अपने दो बीघे छोटे से जमीन पर भाजी तरकारी के उपज को जरूरतमंद लोगों को बेचकर अपने परिवार के पेट पाला करते थे। आज बेरोजगारी की दहलीज पर खड़े हो गये हैं।
  देश और प्रदेश का विकास करना तो गर्व की बात है, लेकिन छोटे व्यवसायों को उजाड़कर क्षेत्र का विकास किया जाए तो ऐसे विकास से गांव की वह जिंदगी अच्छी है जिसमें लोग चैन की जिंदगी तो बसर करते हैं।
 निःसंकोच देश को तीसरे महा शक्ति बनाने में भाजपा की केन्द्र सरकार भरपूर कोशिश कर रही हैं। कस्बों और जोड़ियों को उजाड़कर फैक्ट्री और माल बनाये जा रहे हों लेकिन इस विकास का लाभ शायद कुछ मुट्ठी भर लोग ही उठा पाने में सक्षम हैं। मकान, दुकान,व्यवसाय को बढ़ाने केन्द्र सरकार छोटे व्यवसायों को आर्थिक मदद कर उनके जीवन स्तर को संवारने में सहयोग जरूर करती है परन्तु रेल्वे स्टेशन रोड के उन फुटकर दुकानदारों का क्या होगा ?जिन्हें पुनः व्यवस्थित करने के लिए ना तो रेल विभाग ने कोई योजना बनाई है और ना केन्द्र सरकार ने।
      बड़े अफसोस का विषय जिन्हें कांग्रेस अपना पक्का वोट बैंक समझती है उनके इस दुख की घड़ी में समर्थन देने या सांत्वना देने क्षेत्रीय विधायक और प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे भूपेश बघेल ने भी उजड़ते घर और व्यापार के लिए दुख व्यक्त किया हो या समर्थन देते नजर आये हो। लेकिन चुनाव के नजदीक आते ही यही विधायक और सांसद गलियों में घूमते हुए शुभचिंतक बने अवश्य नजर आने लगेंगे।
      कुम्हारी नगर पालिका के चुनाव हुए कुछ ही दिन बीते होंगे जब गली गली में सैकड़ों की तादात में नेता दिखाई दिये थे,लेकिन अब ना तो इन व्यथित मतदाताओं को सहानुभूति देने कोई नेता दिखे और ना ही कोई सांसद या विधायक ! वे एक दूसरे के दुख-दर्द को बांटकर ही रह गये।
     रेल्वे के तोड़ूदस्ते से इन विस्थापितों के व्यवस्थापन के लिए केन्द्र की योजनाओं पर बात की गई तो इसे अतिक्रमण कहकर स्वयं बचते रहे और विभागों पर जवाबदारी थोपते रहे । देश के प्रत्येक नागरिक को राज्य सरकारें यदि उनके व्यवसाय या आवास से विस्थापित करती है तो संवैधानिक तौर पर व्यवस्थापन भी करती है। तो क्या इन असहाय स्थानीय नागरिकों को कोई हर्जाना या मुआवजा या फिर व्यवस्थापन केन्द्र या राज्य सरकार नहीं करेगी ?

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